शनिवार, 26 सितंबर 2015

sayber ,samaj, are internet

saraf veena.18@gmail.com

"साहित्य समाज का दर्पण है"!साहित्यकरो ने अपने लेखन में भौतिक एवं सामाजिक वातावरण। कीअंतःक्रिया को हर युग में अभिव्यक्त किया है !  आज के उपभोक्ता वादी युग में सम्पूर्ण विश्व इस कठिनाई एवं समस्या से व्यथित है !हेर स्टार पर इसके प्रयास हो  रहे है !जिसके द्वारा  मानवीय संवेदनाओ की सूक्षतम अभिव्यक्ति संभव होती है अतः आज के युग में साहित्यकारों की भीमिका अहम ,व्यापक एवं महत्वपूर्ण हो जाती है 
जीवन के प्प्रत्येक पक्ष का बिम्ब सहिताय में देखा जा सकता है !वह जीवन के स्वेत-स्याम दोनों पक्षों को उजागर कर चिंतन के लिए विवश करता है !अद्योगिकी एवं तीर्वतामविकास से मानव समाज जिस परिवेश में जीवन जी रहे है, उसमे प्रतिक संसाधनो का दोहन तो कर रहे हैहै पर उनके संवर्धन त्तथा विकास के प्रति उदासीन है ! 

विसात होते जीवन सवरक्षण और कंप्यूटर----- 
अज्ज समाज की मुख्य ज्ञानेन्द्रिय का रुपले चूका है !अर्थात मशीनी युग में मानव की आँख, नाक, कान , जुबान, सब बन चूका है !इस प्रकार समाज के अस्तित्व में मशीन की भूमिका सर्वोपरि हो गयी है !
 इंटरनेट ----
इंटरनेट का उदय इसके साथ अपराध का एक नया आयाम लाया गया है! "आईटी अधिनियम "अधिनियम २००० राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो किक़ि रिपोर्ट प्रदर्शन किया इसके बावजूद यह अधिनियम स्पस्ट रूप से पूरी तरह से वेबसाइटों ,हेकिंग से अपराधियो को रोक नहीं पायेगा "१ 
इंटरनेट उपयोगकर्ताओ के लिए अधिक सा वधानी  की जरूरत है !जितना संभव  हो निजी डे ता की रक्षा करने के लिए इन्वेबसाइटो की गोपनीय -नीति अनिवार्य है ! 

हमारा लक्षय विकास एवं सवरक्षण होना चाहिए !
वर्तमान को सुधरकर भविस्य को विकसित स्वरक्षित करना है !सुरक्षा के लिए विश्व के सभी विकसित व् विकासशीलदेशो को आगे आना होगा !इस उपभोक्ता बाज़ारवादी  सरकार व् जनता का यह दायित्व है की 
भूमण्डल को इन कारणों से बचाये तथा धारणीय विकास की प्रक्रिया को अपनाये !वैज्ञानिक ,तकनीक शोध को नयी दिहा दी जाये जिससे वैकल्पिक साधनो के लिए नयी सोच प्राप्त हो सके ! इस सव्रेक्षण हेतु जनता की सजगता, जागरूकता के साथ साथ सअवरक्षण सम्बन्धी कानून और उस्काक्रियान्वयन आवश्यक है!
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